स्वामी विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता



"उठो जागों और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए"। स्वामी विवेकानंद का ये विचार आज भी हर युवा के मन मस्तिष्क में इस तरह से रचा बसा हुआ है ∣ कि जब भी वो  खुदा को निराशा से घिरा हुआ पता है ∣ तब वो अपने मन मस्तिष्क में स्वामी विवेकानंद के उन विचारों को खोजने लगता है जो उसे प्रकाश की ओर ले जाएं ∣
  आज जब प्रश्न खड़ा होता है कि 21 सदी में स्वामी विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता है ∣ तो इसका समर्थन करने में बिलकुल भी देरी नहीं लगती है ∣ 

आज के समय में विवेकानंद के विचारों जिनकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है ∣


1.हजारों ठोकरें खाने के बाद ही एक अच्छे चरित्र का निर्माण होता है ∣

स्वामी विवेकानंद के मुताबिक एक व्यक्ति हजारों ठोकरें खाने के बाद ही अच्छे चरित्र का निर्माण कर पाता है ∣

जब इंसान को ठोकर लगती है तब ही वो खुद की अहमियत को समझ पाता है ∣ वो खुद के चरित्र निर्माण कर पाता हैं ∣ जब वो अपने जीवन में मुसीबतों का सामना करता है ∣ तब वो उस से लड़कर एक नया विचार ग्रहण करता है ∣ वो खुद का एक नया रूप पाता है ∣

2.जब तक जीना है सीखना है अनुभव ही जगत का सबसे बड़ा टीचर है∣

स्वामी विवेकानंद के मुताबिक इंसान का सबसे बड़ा टीचर उसका अनुभव होता है ∣ जो उसे जीवन की मुश्किल से मुश्किल चीज सीखा देता है ∣ 

आज के समय में ज्यादातर युवा इसलिए असफल हो जाते हैं क्योंकि वो कुछ नया करने से दूर भागते है ∣ वो असफलता के अनुभव का स्वाद लेने से डरते है ∣ ऐसे समय में और भी ज्यादा जरूरत होती है ∣ स्वामी विवेकानंद के विचारों को पढ़ने और समझने की  ∣ 
 
3.मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है ∣

स्वामी विवेकानंद के मुताबिक चलना जीवन और ठहरना मुत्यु के समान है इसलिए व्यक्ति को हर हाल में चलते रहना चाहिए  ∣
 आज के समय में जब देश की आबादी चीन को पीछे छोड़ने में कुछ ही दूर है ∣ ऐसे समय में भारत में हर क्षेत्र में बढ़ती प्रतियोगिता युवा के मन में असफलता की चिंता पैदा कर रही है ∣ जो उसे कुछ भी नया करने से रोकती है जिसका कारण उस युवा के मन में छुपा असफलता का डर है ∣ ऐसे समय में स्वामी विवेकानंद के विचार को आत्मसात् कर युवा जीवन के उतार चढ़ाव के बीच चलते रहने का पाठ   सीख सकता है ∣
  
4 खुद को कमजोर समझना ही पाप है ∣

स्वामी विवेकानंद के मुताबिक अगर हम खुद को कमजोर समझ कर आगे कुछ नही करते हैं ∣केवल इस विचार में बैठे रहते हैं कि हमें कुछ नही आता है तो ये हमारी सबसे बड़ी भूल होती है ∣ खुद को कम आंकना ही हमारे लिए सबसे बड़ा पाप होता है ∣
आज की रंगभरी दुनिया में जहां फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे सोशलमीडिया प्लेटफार्म के बीच हम अपना जीवन जी तो रहे होते हैं जहां हम उसकी रंग बिरंगी दुनिया के बीच खुद को कम समझने लगते हैं ∣ ऐसे समय में विवेकानंद के विचार हमारे लिए और ज्यादा जरूरी हो जाते हैं ∣






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