हर इंसान का दुनिया को देखने का नजरिया अलग होता है ∣ जिसे संचार की भाषा में ' फ्रेम ऑफ रिफरेंंस' कहा जाता है ∣ जो व्यक्ति के सामाजिक, आर्थिक, और राजनीति परिवेश से जुड़ा हुआ होता है ∣ ऐसे में जब बात सही और गलत की आ जाती है तब हम देखते हैं कि व्यक्ति की सोच तक ही सीमित सच और गलत होता है ∣ आज जब हमारे चारों तरफ उन चीजो को महिमा मंडित किया जा रहा है जो एक अच्छे समाज के लिए ठीक नहीं है ∣ तब हमें फर्क करना जरूरी है कि आज के समय में हम जिस फिल्म को देख बड़ा अच्छा महसूस कर रहे हैं कहीं ऐसा तो नहीं कि वो हमारे मन में एक नकारात्मक सोच बना रहा है ∣ जहां गली देना, किसी भी प्रकार की हिंसा करना सही है ∣
वो बात जो जरूरी है