क्या सच में आजाद है हम ये सोचना जरूरी है जहां आजादी के 78 साल हमने मना लिए पर अब 79 वे साल में ये सवाल करना जरूरी है जहां देश की आधी आबादी क ई तरह की बंदिशे में बंधी है जिसके आफिस जाने का समय भले निश्चित न हो पर आफिस से आने का समय निश्चित है जहां रात सड़कों पर निकलती लड़की हर किसी को लगती पब्लिक प्रापर्टी है।
वो बात जो जरूरी है