Skip to main content

Posts

Showing posts from June 15, 2020

एक कलाकार की व्यक्तिगत जिदंगी दिखाती है कागज के फूल

हम से कई  लोग फिल्म की दुनिया को देख बाकी सारी चीज  भूल जाते हैं और सोचते हैं कि ये दुनिया कितनी ज्यादा अच्छी है और इसमें कितनी चमक है लेकिन इस दुनिया के लिए ये कहावत बिल्कुल सही लगतीं है 'कि दूर के ढोल सुहाने लगते हैं. जहाँ  ऊंचाई पर पहूंचने के लिए बहुत वक्त लगता है लेकिन नीचे गिरने में एक वक्त क्या एक मिनट भी नहीं. इस दुनिया में केवल वो ही लोग अपने स्थान पर टिके  रहते हैं जो लगातार कोशिश करते हैं जिन्हें हार से डर नहीं लगता .  * फिल्म इंडस्ट्री कोई भी कलाकार आता तो अपने मन से है पर जाता अपने मन से नहीं*. " 'कागज के फूल मूवी' पूरी तरह से फिल्म जगत के एक ऐसे सच को प्रकट करती है जिसे बहुत कम ही लोग जानते समझते हैं."