वैसे तो महिलाओं के जीवन काल में पीरियड्स एक सामान्य सी क्रिया है जिससे वो हर माह गुजरती है ∣ पर वास्तव में क्या हमारा समाज खुद महिलाएं इस विषय को लेकर सामान्य सी हो पायी है ? जहां न शिक्षित न अशिक्षित सब इस विषय पर चुपी साधे है ∣ ये पुरुष समाज को जानने की बात नहीं है ये कहकर बरसों से इस विषय पर मौन रखें है ∣ अब जब ये सवाल आया है कि महिलाओं को पीरियड्स लीव देनी चाहिए कि नहीं? तब इसको लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गयी है ∣ जिसके लेकर एक पक्ष पीरियड्स लीव को सही दूसरा उन्हें कमजोर बताने की कोशिश में है ∣ पर इस पर कुछ भी कहने से पहले हम सबको कुछ बिन्दुओं पर ध्यान देने की जरूरत है ∣ आज भले हम स्वच्छ भारत मिशन की बड़ी बड़ी बातें कर रहे हो किन्तु आज भी सार्वजनिक शौचालय की स्थिति कितनी बदत्तर है ये बात किसी से छिपी हुई नहीं है ∣ जहां आज भी महिलाएं उनका इस्तेमाल करने से बचती है ∣ ऐसे में पीरियड्स के समय उनको बड़ी ही असुविधा का सामना करना पड़ता है ∣ हर पांच में से एक महिला पीरियड्स के समय एक से दो दिन तक काफी ज्यादा दर्द में रहती है ∣ कई बार तो नौबत अस्पताल तक जाने की आ ज...
वो बात जो जरूरी है