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Showing posts from March 17, 2022

होली पर क्या फिर

  होली पर क्या फिर  होगी वहीं मस्ती जो कभी थी हमारे लिए बहुत सस्ती पर आज मालूम चली उसकी कीमत     बड़े खुशनसीब होते हैं वो लोग जो अपनों संग तैयार  मना रहे होते हैं                  समय के साथ कुछ रिश्ते  जैसे अजनबी से होते हैं       बड़ी मुश्किल से बनते   है रिश्ते त्यौहार का मतलब तो जैसे हम तब ही समझते हैं जहां हमारे अपने  हमारे संग होते हैं जहां खुशियों की  क़ोई कमी न होती है केवल गुलाल के रंग से सबके रिश्ते निखरते है ∣