" मर्द को दर्द नहीं होता " इसका संदेश देने वाली भारतीय मूवी अक्सर आदमियों के उस पक्ष को दिखाना भूल जाती है। जो कि हमारे समाज को बेहतर दिशा दें। अक्सर हम मूवी में एक ऐसा पिता,भाई ,पति, देखते है। जो बहुत साहसी और मजबूत दिल वाला है। जो कभी भी हारता नहीं है जिसे सबकुछ आता है। जो अपने घर वालों की खुशियोें का ख्याल रखने के लिए ही बना है। ऐसा दिखाते हुए वो भूल जाते हैं कि आदमी भी इस दुनिया में खुश रहना चाहता है। वो भी कई बार कुछ चीजे में हार सकता है उसें भी नाकामी हाथ लग सकती है। आखिर वो भी तो एक इंसान है। क्यों हम पुरूषों को 'सुपर मैन' की संज्ञा देकर अपने सिर वो बोझ हल्का करने की सोेचते है जो केवल उसकी नहीं पूरे एक परिवार की जिम्मेदारी होती है। बच्चों को अच्छी सुख सुविधा देना केवल उसका कर्तव्य नहीं होता है। बल्कि उन बच्चों का भी होता है जो बड़े आराम से कहते है कि हमें यही चीज चाहिए । हम सस्ती चीजों का उपयोग करने के लिए नहीं बने हुए है। आज हम एक तरफ समानता की बात करते है दूसरी तरफ घर को आर्थिक संसाधन उपलब्ध करने का जिम्मा केवल पुरूषों को दे देते है। ये क्य...
वो बात जो जरूरी है