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Showing posts from September 7, 2022

आनंद

कुछ घड़ी सुख के कुछ घड़ी दुख के संग चलती जाती जिंदगी थोड़ा गिर के थोड़ा उठ के,  चलती जाती दुनिया यही तो है समय के साथ चलने का मधुर आनंद  कभी थक, कभी बैचेन होकर भी  मुख में सूरज की तरह तेज रखने का  होता सब का मन,  कल से बेहतर होने की यहां पर मची रहती दौड़  यहीं तो जीवन का रस  जो गतिमय होकर  चलता जाता  ढेरों थकान के बीच दिल में एक नयी आश लिए खग संग है चलता जाता यहीं तो है जीवन का आनंद∣