Periods : पीरियड शब्द बोलना क्या आज भी हमारे समाज में नॉर्मल है? जहां शहरों में इस विषय पर बात करने में हिचकिचाहट है। फिर गांव से कैसे उम्मीद करें, कि वहां ये नॉर्मल होगा। भले इस पर अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन 'Padman' आ गयी हो। जिसे हम आप ने अपनी फैमिली के साथ मिलकर देखी हो। लेकिन आज भी हम वहीं खड़े है जहां पहले खड़े थे। पर ये विषय आज क्यों...इस विषय पर बात आज क्यों... 26 मार्च की घटना आम नहीं है वैसे तो पीरियड हर लड़की के लिए एक सामान्य सा है। जिससे वो अपने जीवनकाल के एक लंबी अवधि तक गुजरती है। लेकिन इसके बावजूद आज भी हमारे देश में न गांव, न शहर लड़कियों को अपने पहले पीरियड से पहले, उसकी कोई भी जानकारी नहीं होती है। न घर में इस पर बात होती है न स्कूल में उन्हें बताया जाता है। 26 मार्च की घटना ने जैसे हमें एक बार ये बता दिया है। हम पीरियड्स पर जैसी सोच पहले रखें थे, वैसी आज भी रखें है। इसमें ज्यादा कुछ बदलाव नहींं आया है। जहां मुम्बई की एक लड़की अपने पहले पीरियड्स के दर्द के चलते मानसिक तनाव में आ जाती है। वो लड़की सुसाइड कर लेती है।...
वो बात जो जरूरी है