क्या लिखूं मां तेरे लिए क्या लिखूं जो कुछ भी कहने से पहले समझ जाती है हमारे लिए कितना कुछ सह जाती है जिसके लिए हमारी खुशी से बढ़कर नहीं होती कोई खुशी जो बहुत कुछ हमें सीखा जाती है जब जब गलती करते हैं हम तब हमें सीख दे जाती है माँ उसके लिए जितना कहो सबकुछ कम ही है जो हमारे लिए अपनी सारी खुशी न्यौछावर कर जाती है।
वो बात जो जरूरी है