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Showing posts from March 27, 2021

हम नहीं सोचेगें तो कौन

बात अगर हमारे हक की आती है तो हम अपने हक को मांगने के कोई कसर नही छोड़ते ऊंची चोटी का जोर लगा देते हैं और  शासन से मांग करते हुए कहते हैं कि हमारे हक की चीजें दीजिए किन्तु जब वहीं हमें कल के भविष्य के लिए कुछ बेहतर  देने की बात होती है तो हम, उसके लिए  जान न पहचान चले है प्यार करने जैसी बातें करने लगते  हैं आज देश में प्राकृतिक संसाधन का उपयोग जमकर हो रहा है जिसमें बात ऊर्जा ,जल  ,कोयले   और वनस्पति की हो, जिसकी लूट मंची है हम विचार ही नहीं कर रहे हैं  कि इसके संसाधन खत्म होने पर हम कहाँ जाएगें,  आज तो केवल अवाम की जनता में  इस बात की भाग दौड़ मची है कि कौन किसे आगे जाता है संसाधन को हरण करने में हर चीज अपने में काबिज करने में  बिना जंगलों की खैरियत जानें बगैर, बिना साधन की खैरियत जाने बगैर सब कुछ लूट जा रहा है आज से 50 साल  के बाद आप में से  कितने लोग रहेगें ये भविष्य के गर्भ में है किन्तु हम अपनी भावी पीढ़ियों के लिए क्या ऐसा कुछ छोड़ पाएगें  जिसके वो हकदार है ये हम पर  निर्भर करता है भले व़ो स्वच्छ जल, स्वच्छ ...