राधिका हत्याकांड राधिका का मर जाना सामान्य नहीं हो सकता राधिका का मरना सामान्य नहीं उसे सिर्फ उसके पिता ने नहीं मारा बल्कि हर उस इंसान ने उसे मारा जिसके सोच में लड़की का मतलब सिर्फ एक बोझ था जहां बेटी की कमाई खाने वाला पिता ही खराब था जहां बेटी बंदिशों में अच्छी लगती ये हर किसी का ख्याल था। राधिका का मर जाना सामान्य नहीं वो समाज के मुंह पर वो तमाचा है जो दिखाता कि ये समाज सिर्फ पुरुष के लिए बनाया पुरुष ने चलाया और उसको ही सबकुछ करने का अधिकार था अगर कर कुछ बेहतर करने की कोशिश एक लड़की तो ये समाज का ताना बाना होता है खराब इसलिए वो समाज विवश कर देता है एक पिता की वो अपनी बेटी की कर देता हत्या है।
वो बात जो जरूरी है