राग दरबारी पुस्तक समीक्षा परिचय रागदरबारी मुख्य रूप से शहर से दूर एक गाँव जिसका नाम शिवपालगंज है उस पर आधारित है इसमें बताया गया है किस तरह गाँव में आज भी ज्यादा कुछ नहीं बदला लोग अपने काम को घूस देकर ही करते हैं जहाँ स्कूल कालेज खुले जरूर है किन्तु उनमें वो शिक्षा कम ही दी जाती है जिसकी उनको जरूरत है. श्रीलाल शुक्ल ने राग दरबारी के माध्यम से न सिर्फ समाज की अनेक विषमता को व्यंग्य के साथ बताया है बल्कि समाज पर एक तरह का तंज भी कसा है जिसका मुख्य किरदार बाबू रंगनाथ है जो शहर से गाँव घूमने आता है जहाँ वो हर चीज को देखकर बड़ा अचम्भित होता है जहाँ बच्चे को स्कूल से लेकर घर तक एक अलग ही पाठ पठाया जाता है जहाँ राजनीति से लेकर गाँव का साधारण व्यक्ति भी किस तरह से किसी सत्ता से प्रभावित है वो उसे स्पष्ट तौर पर देखता है . भाषा शैली इसकी भाषा शैली में मुहावरे का उपयोग बहुत सही तरीके से किया है जैसे चोखा काम, चोखा दाम तो वहीं दूसरी और इसमें गामीण भाषा का तो उपयोग किया ही गया है साथ ही ...
वो बात जो जरूरी है