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Showing posts from April 12, 2021

जानें नवरात्रि के बारे में सब जो आप जानना चाहते हैं

नवरात्रि शब्द एक संस्कृत शब्द है। जिसका अर्थ नौ रातें है। एक वर्ष में चार बार नवरात्रि मनायी जाती है। जिसमें चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि होती है। जिसमें सबसे बड़ी नवरात्रि शारदीय और चैत्र नवरात्रि होती है। चैत्र नवरात्रि की उत्पत्ति की कथा शिव पुराण के अनुसार एक महिषासुर नाम के  राक्षस ने भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करके ये वरदान मांग की कोई भी देवता या पुरूष उसको मरा नहीं सके वो हमेशा अमर रहे जिस पर भगवान ब्रह्मा ने कहा संसार में जो भी चीज़ आयी है उसको जाना आवश्यक है। तब वो कहता है कि मेरा वंध केवल एक स्त्री करेगी तब भगवान उसे वरदान देते हैं। वरदान के प्रभाव के चलते वो अपना आधिपत्य जमाने के लिए हर जगह आक्रमण करता है और अपना शासन जमता है। जिसके प्रभाव के चलते इंद्र का सिंहासन भी नहीं बचता तब देवता और असुरों के बीच भयंकर युद्ध होता है जिसमें देवता के अलावा भगवान ब्रह्मा और शिव भी अपनी सहभागिता करते हैं। किन्तु उस महिषासुर राक्षस से सभी परास्त हो जाते हैं।  तब सभी देवो ने माता पार्वती से महिषासुर का वंध के लिए प्रार्थना की माता पार्वती  देवों की ...

कोरोना वायरस पर क्या कहते हैं आकड़े

आप सब अवगत है कि आज रात 9 बजे से सोमवार सुबह 6 बजे तक मध्यप्रदेश की राजधानी में  कर्फ्यू रहने वाला है जो सभी भोपाल वासियों के लिए दुखद खबर है  क ई लोग जो अपने लिए आगे की  योजना बना रहे थे वो अब कुछ दिन के लिए उसको गति में नहीं ला पाएंगे   ऐसा नहीं इस कोरोना वायरस का असर केवल मध्यप्रदेश में ही है बल्कि कोरोना दिल्ली, महाराष्ट्र, और छतीसगढ़, में भी तेजी से बढ़ रहा है जिसके चलते महाराष्ट्र और छतीसगढ़ में  भी कड़ाई के साथ  लॉकडाउन लगा दिया गया है जबकि देश की राजधानी दिल्ली के अस्पताल में बिस्तर की संख्या बढ़ा दी गयी है  भारत कोरोना वायरस की दूसरी लहर का शिकार हो  रहा है  ये जिज्ञासा का प्रश्न हो सकता है ? भारत कोरोना को नियंत्रित अमेरिका से अच्छे ढंग से  कर  पाया या नहीं जानने लायक हो सकता है?  किन्तु ये बात भी उतनी ही सत्य है कि भले ही कोरोना वायरस को देश में आए एक साल हो गया किन्तु हमने उसे उतने गम्भीरता से नहीं लिया जैसा की हमें लेना चाहिए वहीं दूसरी तरफ देश में हो रहे चुनाव  ने भी कोरोना वायरस के केस बढ़ने में अपना यो...

जब मालूम हो

जब मालूम है कि कुछ  पल के लिए ही हो तुम  यहाँ  तो कैसे काटोगें कुछ दिन  की रतियां जब मालूम कुछ दिन ही देखोगें  या की गलियां तो कैसे निहारों  के यहाँ की बालिया जब मालूम है कुछ दिन ही निहार  पाओगे  यहाँ के पहाड़ और यहाँ की खूबसूरत वादियाँ तो कैसे देखेगी तुम्हारी अखियां जब इसकी भनक है तुम्हें कि  कुछ कुछ दिन ही गुजारोगें  यहाँ की रतियां  जब जान पड़ता है यहाँ से जानें का समय तो कैसे कैसे  काटोगें हर दिन हर रतियां