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Showing posts from January 12, 2020

स्वामी विवेकानंद के विचार

१. बल पुण्य है और कमजोरी पाप है। २. किसी भी देश की प्रगति के लिये महिला का सशक्त होना जरूरी है। ३. किसी भी देश के विकास के लिये युवाओ का योगदान आवश्यक है । पढ़ाई केवल वो नहीं जिसे हम किताब से पढ़ते है उसका असली मतलब हमारी व्यावहरिक जानकारी और समझ है। ४. जीवन का उद्देश्य अपने जीवन को सार्थक बनना है। ५. हमेशा कुछ सीखने के लिये तत्पर रहो। 'उठो जागो और तब तक संघर्ष करो जब तक मंजिल न मिल जाऐं। '

युवा

"मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है" युवा ये नाम ही हमारे मन में एक ऊर्जा सी पैदा करता है। युवा को हमेशा कुछ नया सीखने की ललक होनी चाहिये। अपनी सीमा से बाहर निकल कर काम करना चाहिये।जो वो है उसे बेहतर बनने की कोशिश करना चाहिये। ऐसा कोई भी काम नहीं जो ये नहीं कर सकता । पूरा करने के लिये जज्बा चाहिये। आज के समय में युवा के सामने सबसे बड़ी समस्या इतने सारे भटकाव का होना है। उसे सही राह दिखाने वाले की कमी है । जिस कारण से वो बहुत थका और स्वयं को हार हुआ समझने लगा।जबकि संचाई इसके विपरीत है । वो कमजोर नहीं बल्कि भटका हुआ जहां उसे सही रास्ता दिखाने की जरूरत है । स्वामी विवेकानंद जिनके जन्म दिवस को 'युवा दिवस ' के रूप में मनाया जाता है उनके जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिये विवेकानंद का पूरा जीवन दूसरो की सेवा करने में लगा रहा यहां तक की जब वो विदेश के दौरे पर गये तब भी वो अपने भारत देश को नहीं भूले। उनका शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में भाषण इतना अच्छा था जिस काऱण से पूरे विश्व भर में उनके नाम के साथ भारत का नाम भी प्रसिध्द हुआ। मुझें स्वामी विवेकानंद के जीवन क...