हर कड़वी लगने वाली बात कड़वी ही हो। ये बिल्कुल जरूरी नहीं। क ई बार कड़वी लगने वाली बात ही हमें जिंदगी में बेहतर स्थान पर ले जाती है। अपनी तारीफ पर खुश तो कोई भी हो जाता है जो अपनी आलोचना को स्वीकार कर ले। महान तो वो है।
वो बात जो जरूरी है
वो बात जो जरूरी है