एक तरफ जहां देश आजादी का जश्न मनाना रहा है वहीं दूसरी तरफ अभी भी घर आयी नयी नवेली दुल्हन को उसकी सीमाएं बताने की कोशिश की जा रही है कि वो चाहे कितनी समझदार हो उसे यहां रहना तो ससुराल के मुताबिक ही है। ये सोच आज शहरी लोग की है जो अपने आप को शिक्षित कहते हैं। फिर गांव के लोगों से क्या उम्मीद की जा सकती है। ऐसे में आज अहिल्याबाई होल्कर का जिक्र करना जरुरी हो जाता है जो हर भारतीय नारी के लिए एक प्रेरणा है। जिनकी बदौलत आज नारी शिक्षा जैसी मूलभूत चीज को ले पा रही है। हालांकि जब हम भारतीय इतिहास को गौर से देखते है तो पाते है प्राचीन समय में भारतीय नारियां न सिर्फ शिक्षा को ग्रहण करती थी बल्कि रण में जाकर युद्ध भी लड़ती थी। पर जैसे जैसे सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत पर अंग्रजों ने आक्रमण किया उनकी स्वतंत्रता जैसी छिन सी गयी। इसके परिणामस्वरूम आने वाले समय में उन्हें परदा ,सती प्रथा जैसी कुरीतियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रांति को कैसे भूला जा सकता है जिसमें रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगना ने मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दि...
वो बात जो जरूरी है