26 जनवरी साल 1950 जब देश का संविधान लागू हुआ। पूरे देश को एक कानून मिला है। जो आज भी चल रहा है। आज जब हम उस संविधान को देखते हैं तो पाते हैं कि उस संविधान की बदौलत ऐसा बहुत कुछ मिला जिसने इंसान को इंसान समझने की कोशिश की।जिसने समाज में व्याप्त वर्ण व्यवस्था के खिलाफ समानता जैसे मौलिक अधिकार की बात की। जिसके अनुसार कानून के समक्ष सब समान है जाति या धर्म, लिंग को देखकर कोई व्यक्ति विशेष नहीं है जिसने हम सब को सोचने का एक नया नजरिया दिया। आज जब उस संविधान की बात कर रहे है, तो ऊपरी तौर पर हमें बहुत सी ऐसी सकारात्मक चीजें देखने को मिलती हैं जो हमें इस संविधान की बदौलत मिली। मसलन संविधान ने नागरिकों के अधिकारों, कर्तव्य और लोकतंत्र व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ऐसी व्यवस्था दी जो अच्छे समाज का निर्माण कर सके। इसके बावजूद जब गांव देहात में ये मूलभूत चीजें देखने की कोशिश करते हैं। कि वहां लोगों को किस तरह से देखा जाता है तो हम बिना जाति के ये देख ही नहीं पाते कि उनका अपना क्या अस्तित्व है जहां आज भी वो कई चीजों के लिए उतना ही संघर्ष कर रहे हैं जितना की पहले करते थे। जहां राज...
वो बात जो जरूरी है