Skip to main content

Posts

Showing posts from June 25, 2020

नैतिक त्रासदी से कुछ सीख सके

  मुझे इस विषय पर  बात करते हुए  निर्मल वर्मा का निबंध 'आदि और अंत ' याद आ गया जिसमें निर्मल वर्मा कहते हैं   " कि आपातकाल भले इन्दिरा गाँधी ने अपने नैतिक लाभ की पूर्ति करने को लगाई थी लेकिन इसके अप्रत्यक्ष रूप से जनता को भी लाभ हुए थे जिसमें नौकरशाही पूरी ईमानदारी से काम कर रहती थी बाजार पर पूरी तरह से सरकार का नियंत्रण था लोग अनुशासन पूर्ण जिंदगी जी रहे थे ". "हर चीज के दो पहलू देखना  जरूरी है जिस तरह चाकू के सही उपयोग से सब्जी को काटा जाता है ठीक उसी तरह उसके दुरूपयोग का परिणाम किसी की जान  लेना होता है ये  हम पर निर्भर करता है कि हम उसका उपयोग कैसे करते हैं."