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Showing posts from January 24, 2021

गुलाब की कली

  कितने कांटों के बीच पली कितने दर्द को सहती नन्ही कली तेरे खिलने से पहले कितनों को तेरी जरूरत पड़ी कितने तुझे पहले ही पेड़ से तोड़ देते किन्तु  पेड़ को तेरी कमी न खली हे गुलाब की कली तु कितने तूफान से लड़ी  ‌       अक्सर तेरी जरूरत सबको पड़ी.