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Showing posts from June 19, 2021

वो पिता ही तो होते हैं

वो पिता ही तो होते हैं जो हमें गलती करने पर  डाट लगाते  है किन्तु जब बात आए हमारी तरफदारी की तो मम्मी से ज्यादा वो ही तो हमारे लिए दूसरों से है लड़ते हैं,  जो देते हैं हमें संदेश जीवन जीने का कि करोगें परिश्रम तो ही मिलेगा  तुम्हें इस दुनिया से कुछ नेक वरना हो जाओगे तो तुम ऐसे ही बूढ़े तुम्हारे बाल होगें  धूप में ही  सफेद  ,  लोग कहते हैं कि हर बाबुल के  घर में होता है बिटिया का  ठिकाना कुछ दिनों का किन्तु जब बेटी ससुराल चली जाए उसकी राह माँ से ज्यादा पिता ही तो देखते हैं,  माँ की तरह भले पिता अपने  स्नेह का इजहार न करें अपने बच्चों से किन्तु अपने बच्चों की खुशी के लिए  कितना कुछ सहते हैं,  माँ देती है हमें जीवन जीने की सीख तो पिता हमें जिंदगी को कैसे जीना है  उसकी सीख हर समय देते हैं वो पिता ही तो होते हैं जो हमारी जिद्द को पूरा करने के लिए अक्सर अपने खर्च कम कर देते हैं ∣

जिंदगी जीने का तरीका सीख लो

इस दुनिया में सब लोग जन्म लेते हैं ∣ और सभी लोग मरते है इसमें कोई बड़ी बात नहीं है ∣  बड़ी बात तो तब होती है ,जब तुम अपनी जिंदगी को ऐसे जीओं कि केवल तुम्हारे लिए नहीं बल्कि दूसरे के लिए भी प्रेरणा बने    ∣   जिसे सुनकर लोग अपने जीवन  के उन ख्वाब को पूरा करने की सोचे जिन्हें देखा तो उसने अपनी आंखों से किन्तु दुनिया के डर से उसे करने का साहस न किया     ∣  बहुत कम ही होते हैं वो लोग जो अपने जिंदगी को ऐसे जीते हैं ∣ कि लोग केवल उनकी सफलता ही जान पाते हैं ∣ किन्तु उनकी असफलता का दर्द  वो खुद ही पीते हैं ∣  हमें देते हैं जिंदगी जीने का संदेश  आएं हो तो कुछ करके जाओ़ इस दुनिया में वरना बोझ बन जाओगे तुम अपने ही घर में ∣ 

नहीं रहें मिल्खा सिंह

भारत ने अपने एक सपूत मिल्खा सिंह को खो दिया ।जिसने भारत का नाम रोशन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और भारत को  कॉमनवेल्थ में स्वर्ण पदक दिलाया ।   आज वो हम से इतने दूर चले गए , जहाँ से किसी शख्स का आना लगभग नामुमकिन है। अगर हम इनके अतीत के पन्नों को देखें तो जानेगें,  मिल्खा सिंह का जन्म 2० नंम्बर सन् 1932 में पाकिस्तान के गोविन्दपुर नामक गाँव के एक सिख परिवार में हुआ था  ।वे एक ऐसे सिख धावक थे ।जिन्होंने  196० ग्रीष्म ओलम्पिक टोक्यो और सन् 1964 ग्रीष्म ओलम्पिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था ∣ भारत विभाजन के दौरान उन्हें अपने माता पिता को खो दिया और पाकिस्तान से भारत आ ग ए । अगर हम उनके सफल करियर की ओर देखें तो जानेगें,  उन्होंने कार्डिफ, वेल्स, सयुंक्त साम्राज्य में 1958 कॉमनवेल्थ    में खेल में स्वर्ण पदक जीत और अपने नाम का नया क्रीतिनाम स्थापित किया ।  जो लोग उनसे परिचित नहीं थे उन्हें 2013 में मिल्खा पर बनी फिल्म' भाग मिल्खा भाग' से उन्हें जान लिया जो कि लेखक ओमप्रकाश मेहरा  ने बनाई थी जि...