गुरु केवल शब्द नहीं बल्कि परमात्मा का रुप है। जो हमारे अंधकार को खत्म कर ज्ञान का प्रकाश देता है। प्राचीन समय से ही गुरु शिष्य की परंपरा चली आ रही है ∣ जहां गुरु शिष्य का मार्गदर्शन करता है ∣ गुरु के जरिये शिष्य अपने साध्य ( सम्भव) असाध्य ( असम्भव ) उद्देश्य को पाने की कोशिश करता है ∣ व्यक्ति गुरु की संगति पाकर हीरे के समान बन जाता है। वो इस तरह के धन का अर्जित कर लेता है जो बांटने से और ज्यादा बढ़ता है।
वो बात जो जरूरी है