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Showing posts from April 1, 2021

कही मूर्ख तो नहीं बन रहे आप

आज लोगों को मूर्ख बनाने का दिन है जो की लोग एक दूसरे को रोज बनाते है महज फर्क इतना हो जाता है कि व़ो हर दिन उनसे साफ शब्दों में ये नहीं कह पाते हैं कि हमने आपको उल्लू बनाया बड़ा मजा आया आज जब हम अपने चारों तरफ  देखें  तो पाएगें कि हर कोई व्यक्ति एक दूसरे व्यक्ति को मूर्ख बनाने में लगा हुआ है और ऐसा करते हुए वो ऐसा सोच रहा है कि लोग उसकी बातों को बहुत गम्भीर ले रहे हैं जबकि वास्तविकता ऐसी है नहीं सिवाय राजनीति के जहाँ हर दिन जनता को मूर्ख बनाया जाता है उससे बड़े - बड़े सपने तो दिखाए जाते हैं किन्तु वास्तविक में कुछ होता नहीं है    दूर के ढोल सुहाने लगते हैं जब वो हमारे नजदीक आते हैं तो वो हमें कर्ण प्रिय न लग कर हमारे कानों को अप्रिय प्रतीत होते हैं  आज ऐसा ही कुछ हम राजनीति में देखते हैं  आज श्रीलाल शुक्ल के रागदरबारी के कई पात्र हम अपने आस पास पाएगें किन्तु अफसोस आज बाबू रंगनाथ बाबू जैसे युवा बहुत कम है   आज मूर्ख दिवस पर हम सब को एक बार जरूर गहन विचार करना चाहिए कि हम कही खुद क़ो ही तो मूर्ख नही बना रहे हैं और  अपने आप से झूठ बोल रहे है...