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Showing posts from July 17, 2024

Life: सबकुछ केवल खुद से बाहर का बेहतर लगता है

आज हम चाहे जितना सुविधा पूर्ण जीवन जी रहे हो। किन्तु उसके बावजूद हम सब एक ऐसी पक्ति में चल रहे हैं। जहां पर सबको एक दूसरे से शिकायत है कि हमारे पास ये नहीं है हमारी जिंदगी में ही सारे दुख हैं। जहां हमारे पास सबकुछ होकर भी कुछ नहीं है। तुलना करने के चलते हम खुद को हर वक़्त कम समझ अपनी चिंता बढ़ा रहे हैं। वजाए  ये सोचने के कि हमारे पास क्या कुछ है।  जिसके चलते हमारी परेशानी बढ़ रही है। हम सब कुछ पाकर भी खाली से है । जो हमारे अवसाद का कारण बन रही है।