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Showing posts from March 9, 2021

दर्द ए जिंदगी से न जाने क्या कह जाते हैं मुसाफिर

जीत की खुशी में अक्सर भूल जाते हैं  हार का गम  शून्य से शिखर तक पाने के लिए अक्सर  छोटी छोटी खुशी भूल जाते मुसाफिर चोट लगने से जितना दर्द नही होता हर समय होने वाला  खुद को साबित न कर पाने का दर्द ही अजब होता,  पा जाते हैं जब सारी ख्वाहिश की चाबी तब  हार जाने का दर्द क्या हमें याद होता ?  इतिहास उठाकर देख लो पथ के मुसाफिर  क्या मंजिल पाने वाले के लिए  रास्ता कभी स्पष्ट होता कांटे नहीं अंगारे चलने वाले के लिए  हर दुख दर्द एक होता तब भी मंजिल पाने का जुनून रखने वाले सिपाही के लिए हर पथ हर दिन आज से कठोर होता तब भी याद वो ही रखे जाते हैं इतिहास के पन्नों में जिनकी शख्सियत ही हार कर जीतने के लिए बनी होती गिरकर उठने के लिए बनी होती तंहा होकर भी जिनके लिए हर दिन जिंदगी एक अग्नि परीक्षा सी होती.