इरादे तेरे नेक है तो शर्म कैसी जब पंख मिले हैं तुझे उड़ने में तो हिचकिचाहट कैसी। तेरे इरादे है जब नेक भीड़ से अलग तू खुद को देख ...
वो बात जो जरूरी है