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Showing posts from May 19, 2022

पुस्तक समीक्षा -एक जिंदगी काफी नहीं

किताब का नाम -  एक जिंदगी काफी नहीं आजादी से सन् 2012 तक के भारत की अन्दरूनी कहानी   लेखक   कुलदीप नैयर  यहां किताब भारत के आजादी से लेकर 2012 तक  के बीच हुए घटनाक्रम को  हमारे बीच कहानी के जरिये लाती है ∣ जो कभी हमें किसी घटना पर विचार करने का मजबूर कर देती है तो कभी हमारी उन गलतफहमी को खत्म कर देती है जो आज भी हम पल कर बैठे है  ∣  ये किताब शुरू तो होती है शीर्षक बचपन और बंटवारे से जहां पर कुलदीप नैयर बंटवारे के दर्द को झेलते हुए कुलदीप सिंह से कुलदीप नैयर हो जाते हैं  जिसका कारण हमें इस किताब को पढ़ने के बाद मालूम चल जाएगा ∣ जैसे जैसे हम किताब को पढ़ते हैं वैसे वैसे हम आजादी, लाल बहादुर शास्त्री,  नेहरू का उत्तराधिकारी, इन्दिरा गाँधी, इमरजेंसी, इमरजेंसी के गहराते साए, ऑपरेशन  ब्लू स्टार, राजीव गाँधी युग, वी पी सिंह का दौर, बाबरी मस्जिद, संसद मे मेरा अनुभव, भाजपा सरकार, मनमोहन सिंह सरकार जैसे विषय पर आधारित कुछ ऐसी कहानी को सुनते हैं जो आमतौर पर हमें सुनाई कुछ जाती है होती उससे कुछ अलग है ∣   इस किताब को क्यों पढ़े? ...

क्या हो अगर हर रोज एक ही कार्य करना पड़े

जरा गौर कीजिएगा मेरी इस बात पर  कैसा हो अगर हमें हर रोज एक ही तरह का कार्य  करना हो, जहां पर हमारे पास कोई भी विकल्प न हो,  ऐसे में हम में से ज्यादा लोगों का ये उत्तर हो सकता है ∣  कि वो काम कितना निस्वाद होगा, जहां हर दिन हमें एक ही तरह का काम करना हो, आज मैं आपको बताने वाली हो वो तरीका जिसके माध्यम से हम हर रोज करने वाले कार्यो में कुछ रंग भर उसमें एक नयापन ला सकते हैं  ∣ इसके लिए सबसे पहले तो हमें अपना दिमाग एक चित्त करके ये ध्यान लगना होगा और खुद से पूछना होगा कि हम क्या करना चाहते हैं हमारा लक्ष्य क्या है ?  उसके बाद शुरू होती है हर रोज करने वाले कार्यों के तरीके में बदलाव करने के लिए संघर्ष,  इसके लिए सबसे पहले तो हमें खुद के प्रति बहुत प्रतिबद्ध होने की जरूरत है जो एक दिन में नहीं किन्तु जब इस प्रक्रिया में खुद को लाएंगे तो कुछ समय बाद हम प्रतिबद्ध हो ही जाएगें  ∣  * जिसके लिए जरूरी है कि हम किताबों को पढ़ना शुरू करें वो भी उस समय जब हमारे पास समय की अधिकता हो , ऐसे समय में हमें खुद को कुछ नया सीखने की ओर अपना ध्यान लगना होगा  ∣ अ...