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Showing posts from May 23, 2022

वो कहानी तो सुनी ही होगी

नैतिक शिक्षा की एक कहानी आज के समय में बहुत जीवंत प्रतीत होती है ∣ जिसमें पिता के द्वारा अपने बेटे को संगति क्यों अच्छी  करनी चाहिए ∣  इसका पाठ पढ़ाने के लिए उसके पिता उसे एक टोकरी सेव लाकर देते हैं ∣ और कहते हैं इन सेव को जाकर अंदर  टोकरी में रख दो वो उसे अंदर रख आता है ∣ कुछ दिनों के बाद पिता उससे वो सेव की टोकरी ले आने को कहते हैं ∣ जब वो टोकरी लेकर आता है तो उसमें एक दो सेव खराब हो जाते हैं ∣ पिता कहते हैं कि जाओं ये टोकरी फिर अंदर रखा आओ कुछ दिन गुजरने के बाद फिर वो टोकरी मांगते है और उस दिन  टोकरी में खराब  सेव की संख्या में वृद्धि मिलती हैं ∣ जिस पर वो लड़का अपने पिता से पूछता है ये कैसे हुआ उसके पिता बताते हैं कि ये सब स़ंगति का असर है ∣ जो जिस संगति में रहता है वो उस तरह का ही बन जाता है ∣ आज के समय में  संगति से व्यक्ति की पहचान होती है ∣ वैसे तो हम इसे शिक्षा के रूप में  बहुत सुनते हैं ∣ पर बात जब खुद पर आ जाती है ∣ तब हम इसे नजर अंदाज करना शुरू कर देते हैं ∣ जबकि हमें उस समय ही जरूरत होती है इस सिद्धांत के पालन करने की आज ये बात महत्व नहीं ...

जीवन की यात्रा

  जीवन में हम सब ऐसी कई यात्रा करते हैं ∣ जो हमें लगती तो जीवन जीने की तरह है ∣ पर वास्तव में वो हमारे जीवन का एक पड़ाव होता है ∣ जिसे पार करके आगे हमें बढ़ना होता है ∣ एक नवजात से हम बाल्यकाल की ओर जाते, बाल्यकाल से वयस्क, और वयस्क से वृद्ध अवस्था की ओर जाकर हम जीवन की यात्रा को  पूरा करते है ∣ हम सब एक क्रम अनुसार ही जीवन में चरण को पूरा करते है ∣ किन्तु इसमें फर्क इससे पड़ता है कि इस बीच हमारे अनुभव और हमारा संघर्ष क्या कर रहा है ?  साथ ही उस अनुभव से हम अपने जीवन को किस दिशा ओर ले गए हैं ∣ कुछ लोग होते हैं जो अपने अनुभव को ही अपने जीवन की ताकत में शामिल कर लेते हैं ∣ बात चाहे खुद को साबित करने की हो, या हार कर जीतने की वो हर मुश्किल से मुश्किल परेशानी में भी खुद को निखारने का तरीका ढूंढ ही लेते हैं ∣ जब जाकर वो अपने जीवन को सार्थक कर पाते हैं ∣