नैतिक शिक्षा की एक कहानी आज के समय में बहुत जीवंत प्रतीत होती है ∣ जिसमें पिता के द्वारा अपने बेटे को संगति क्यों अच्छी करनी चाहिए ∣
इसका पाठ पढ़ाने के लिए उसके पिता उसे एक टोकरी सेव लाकर देते हैं ∣ और कहते हैं इन सेव को जाकर अंदर टोकरी में रख दो वो उसे अंदर रख आता है ∣ कुछ दिनों के बाद पिता उससे वो सेव की टोकरी ले आने को कहते हैं ∣ जब वो टोकरी लेकर आता है तो उसमें एक दो सेव खराब हो जाते हैं ∣ पिता कहते हैं कि जाओं ये टोकरी फिर अंदर रखा आओ कुछ दिन गुजरने के बाद फिर वो टोकरी मांगते है और उस दिन टोकरी में खराब सेव की संख्या में वृद्धि मिलती हैं ∣ जिस पर वो लड़का अपने पिता से पूछता है ये कैसे हुआ उसके पिता बताते हैं कि ये सब स़ंगति का असर है ∣ जो जिस संगति में रहता है वो उस तरह का ही बन जाता है ∣
आज के समय में संगति से व्यक्ति की पहचान होती है ∣ वैसे तो हम इसे शिक्षा के रूप में बहुत सुनते हैं ∣ पर बात जब खुद पर आ जाती है ∣ तब हम इसे नजर अंदाज करना शुरू कर देते हैं ∣
जबकि हमें उस समय ही जरूरत होती है इस सिद्धांत के पालन करने की आज ये बात महत्व नहीं रखती है ∣ कि हमारे कितने दोस्त है ∣ बल्कि ये महत्व रखती है कि हमारे दोस्त कैसे हैं ∣ और हमारी स़ंगति कैसी है ∣
Comments