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Showing posts from April 4, 2020

दो बीघा जमीन

एक गरीब किसान जिसके पास मात्र दो बीघा जमीन के अलावा कुछ भी नहीं है ऐसे किसान   शम्भू   को एक महाजन  अपने काम के लिए उसे उसकी दो बीघा जमीन मांग लेता है और जब वो मना कर देता है तो  शम्भू को पूरा बकाया अगले दिन चुकता को कहता है वो अपने पैसे का हिसाब बेटे से लगवाता है जिसमें  65 रूपये वह  घर के कुछ सामान और पत्नी के झुमके बेचकर महाजन को  देने जाता है  तब चतुर महाजन हिसाब कर 265 रूपये बता देता है जो उसके पास नहीं होते हैं. न्यायालय में उसकी सुनवाई होती है  और उसे रकम अदा करने के लिए तीन महीने का वक्त मिलता है. कहानी अलग मोड़ लेती है वो कोलकता पैसे कमाने जाता है जहाँ वो रिक्शा चलाने वाला बन जाता है और खून पसीना एक कर पैसा कमाता है और जब उसके पास केवल पचास रूपये की कमी होती है तभी उसका पांव टूट जाता हैं और फिर उसका  12 साल का लड़का कन्हैया  वो जूते साफ करने से लेकर चोरी  करने  तक के लिए विवश हो जाता है और  जब    शम्भू   की पत्नी को यह सब मालूम चलता है तो वो...

विचार

हर दिन खुद को साबित करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है. उच्च स्तर पर तो कोई भी आ सकता है लेकिन उसमें टिके रहने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है. खुद को साबित करने के लिए जब भी अवसर मिले उस से चूकों मत क्योंकि तुम्हेँ मालूम नहीं   इसके बाद कब अवसर मिले. हर दिन कल से बेहतर करों तभी कुछ अच्छा होगा. आप उस दिन थोड़े बड़े होगे जिस दिन आप लोगो के बारे में  सोचना बंद कर दे और खुद के बारे में विचार करें.

आज भी जिंदा है माखनलाल हमारे दिल में

                            माखनलाल चतुर्वेदी जब बात मध्यप्रदेश के वीर और साहसी पत्रकारों की  हो तो माखनलाल चतुर्वेदी का नाम न हो तो ये सबसे बड़ी भूल होगी. माखनलाल चतुर्वेदी की कविता 'पुष्प की अभिलाषा 'जिसने पुष्प के माध्यम से वो बात कह दी जिसने मातृभूमि के प्रति प्रेम को प्रकट किया है जो की इस  प्रकार   है- मुझें तोड़ लेना वनमाली उस पथ पर  तुम देना फेंका, मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पर जाते वीर अनेक. माखनलाल चतुर्वेदी के संपादन को लेकर प्रमुख सिध्दांत 1. अखबार में परिवारिका जानकारी न शामिल करना। 2.शुध्दता और स्पष्टता का ध्यान देना। माखनलाल चतुर्वेदी जी रचना संसार- माखनलाल चतुर्वेदी दिवेदी युगीन कवि थे जिस युग की प्रमुख विशेषता,  प्रकृति चित्र ण, मानव प्रेम था. उनकी रचनाएँ- समय के पांव , संस्मरण 1962 में प्रकाशित किया गया। "हिमकिरीटनी के लिए (देव पुरस्कार से सम्मानित)  किया गया.  उनका जन्म 4अप्...