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Showing posts from September 12, 2020

ये कैसा आरंभ है

 ये कैसा आरंभ है जहाँ जलने से पहले बुझता दिया है  चारों तरफ हो रही है परेशानी ही परेशानी छायी जहाँ मानव अपने ही बनाएं नियम में कैद हो गया है,  कही कोई देश महामारी से है पीड़ित  तो कही धुआँ ही धुंआ है कही भरा हुआ है पानी बाढ़ का,  तो आज हमारा व्यवहार भी किस तरह से बदला है फूल तो हर कोई तोड़ ले जाता है बागों से किन्तु पेड़ को काटने से किस ने रोका है.