इसे समय की विडम्बना कहे या आज का पागलपन पर सच्चाई यहीं हैं कि आज इंसान में अहम हद से ज्यादा भरा हुआ है। जहां वो इस अहम के चलते क ई बार दूसरों को नीचा दिखाने से भी बज नहीं आता है। जहां वो बात बात पर अपना नाम , पद, सरनेम के जरिये दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश कर जाता है। जहां वो सेल्फ लव से कब दूसरों के लिए एक असहनीय मर्ज बन जाता है उसे ही मालूम नहीं चलता है।
वो बात जो जरूरी है