'कौन सी बातें कब कहीं जाती जिनको है सलीका केवल उनकी बातें सुनी जाती है। ' जैसे इन दोहो का मतलब राहुल गांधी ने बखूबी समझ लिया है। जहां वो लोकसभा चुनाव के बीच अपने भाषणों में उन विषय पर बात कर रहे है।जो वास्तव में देश का मुद्दा होना चाहिए। जिस पर मीडिया से लेकर सरकार का ध्यान जाना चाहिए। पर धर्म की राजनीति के बीच वो सारे विषय कहीं खो से गए है। बात चाहे रोजगार की हो या देश की सुरक्षा की, वोटों के ध्रुवीयकरण की राहुल हर उस विषय पर बात कर रहे है। जो भाषण से कहीं गुम सा हो गए है। जहां हर जगह सिर्फ एक ही राग आलाप जा रहा है। जैसे देश में कोई और मुद्दा ही नहीं है। तारीफ तो की जानी चाहिए इस बीच राहुल गांधी की इस चीज के लिए तो तारीफ की जानी चाहिए। कि जो काम देश का मीडिया न कर सका। वो गांधी ने कर दिखाया । देश के पीएम के साथ पब्लिक डिबेट करने की बात कर रहे है। जहां बात होगी देश के वास्तविक मुद्दों की। बात होगी करोड़ो रोजगार देने वाले मुद्दों की। मणिपुर में जल रही आग की। जिस आग ने अनगिनत घरों को खाक कर दिया है। जिस से सवाल पूछने का साहस देश का बड़ा से बड़ा पत्रकार न क...
वो बात जो जरूरी है