रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध रचना " संस्कृति के चार अध्याय " जिसे पढ़कर हम अपने बहुत से प्रश्नों का उत्तर पा सकते हैं और अपनी जिज्ञासाओं को खत्म कर एक नया दृष्टिकोण पा सकते हैं जैसे - जैसे हम इस किताब को पढ़ेगे वैसे - वैसे हम उन सभी उत्तर को पा सकेगें जो हमारे मन में काफी समय से थे ∣ इनमें से मैं कुछ बिन्दु आपके समक्ष रखा रही हूं ,इस किताब के दो अध्याय में से पहले अध्याय, दूसरे अध्याय से 1. अहिंसा जैनों का परम धर्म है जिनकी दो सबसे बड़ी विशेषता है पहला अहिंसा दूसरा तप ∣ 2. तमिल रामायण जिसे द्विपद रामायण भी कहां जाता है उसमें निद्रा देवी के बारे में बताया गया है कि लक्ष्मण ने वनवास जाते समय उनसे दो वरदान मांगे थे पहला मेरी पत्नी उर्मिला को 14 वर्ष की नींद दे दी जाएं और दूसरा वनवास के अंत तक जागरण ∣ 3.बौद्ध धर्म ने सर्वप्रथम जाति व्यवस्था का विरोध किया था साथ ही इस धर्म ने जाति प्रथा को चुनौती देकर एक आन्दोलन आरम्भ किया था ∣ 4.आग्नेय जाति ने मूर्ति पूजा करने की शुरुआत की थी साथ ही इसी जाति में सर्वप्रथम सिंदूर का जिक्र मिलता है जिसका वेदों में कहीं भी उल्ले...
वो बात जो जरूरी है