दाग चाहे चरित्र पर लगे या किसी कपड़े पर वो दाग ही कहलाता है ∣ बहुत आसान होता है चरित्र पर दाग लग जाना पर इस दुनिया में बेदाग रहना क्या आसान होता है ? दाग कि चिंता अक्सर लड़कियों को ज्यादा होती है जब महीने का दाग जरा सा भी कपड़ो पर लग जाएं सब की निगाहें जैसे उसके उस कपड़ो पर ही होती है ∣ जिसे आज भी हमारा समाज ऐसे देखता है जैसे उसने कोई बड़ा अपराध कर लिया है ∣ बात चाहे इसमें शिक्षित लोगों की हो या अशिक्षित लोगों की सबका इसको लेकर यहीं मानना होता है कि ये भी क्या बात करने की चीज है ∣ आज भले ही' पैडमैन' मूवी आ गयी हो पर क्या आज भी हम इस पर खुल कर बात कर पाते? आज जरूरत है समाज के उन विषयों के बारे में जानना जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हम से जुड़ा हुआ है ∣
वो बात जो जरूरी है