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Showing posts from November 13, 2019

नेहरू

                              नेहरू आलोचना - नेहरू के अनुसार अपनी आलोचना करने वालों से लड़ना नहीं चहिये बल्कि उनकी बातों को गम्भीरता से लेना चाहिये क्योकि वही एक इंसान होते है जो तुम्हार  बिना किसी  स्वार्थ के गुण दोषों का बखान करते हैं। कष्ट- का  असली मतलब ये नहीं होता कि तुम अपने ऊपर आ रहे कष्ट  को सह रहे हो क्योकि उसे तो तुम्हारा किसी न किसी तरह से लाभ ही होता है वे लोग जो तुमसे  स्नेह करते है  अगर तुम उन पर आने वाली मुसीबत के बारे में  सोचते हो तो तुम कष्ट सह रहे है।

विचार

१. कभी - कभी हमें ऐसा  लगता है कि हमारे पास कितनी सारी समस्याऐं हैं यकीन मनिऐ इस बात का कि सब  के पास कोई न कोई समस्या है लेकिन फिर भी वो हम से  बेहतर जिंदगी जी रहा हैं। २. खुद  को कभी कम मत आकना जब तुम ऐसा करोगे तो लोग तो  तुम्हें कम ही आकेंगे। ३.कितना अजीब होता जब कहीं जाना हो और पूरी बस भरी मिले फिर भी हम उस बस में चढ़ जाते हैं। क्योकि हमें दूसरी बस के आने का इंतजार नहीं कर सकते जब हम बस में चढ़कर दूसरी जगह जाने  मैं इतना संघर्ष कर सकते है तो फिर अपनी जिंदगी में क्यों नहीं । ४. करेले की सब्जी से समझ सकते है कि हर कड़वी चीज बुरी नहीं होती। ५.अपनी बात जब भी किसी के सामने रखिए  तो उसे ऐसे रखिये कि सामने वाला  उसका उत्तर देने को बाध्य हो जाऐं। ६.जब जिंदगी जीनी है तो खुला कर जीऐ आज कहां, फिर कल कहां किस को मालूम।