गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरूर्विष्णु : गुरुर्देवो महेश्वर: गुरु : साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नम :ll गुरु ही ब्रहा है गुरु विष्णु है, गुरु हि शंकर है; गुरु हि साक्षात् परब्रह्म है ; सभी सद्गुरु को मेरा प्रणाम. गुरु शिष्य का अटूट सम्बन्ध है जिसे हम चाह कर भी नहीं झूठला सकते. गुरु शिष्य का सम्बन्ध हम ऐसे समझ सकते हैं कि जिस तरह कुम्हार जब कोई घड़ा बनाता है तो वो उसे बाहर से चोट पहुंचता है किन्तु अंदर से उसे सहारा देता है ठीक उसी तरह गुरु अपने शिष्य के साथ करता है. आज के समय में कुछ इस तरह से है " गुरु की परिभाषा " वो जिसने हमें सीखाया है हंसना रोना किसी के काम न आया है जब जब गिरे है हम तुम्हारे हौसले ने हमें बचाया है, जिंदगी का अर्थ क्या है वो हमें सीखाया है गुरु के सिवा कोई काम न आया है घर वालों ने मुंह फेर जब हम से तब गुरु की बात ने हमारा हौसला बढ़ाया है आज जाकें हमें कुछ समझ में आया है हंसना रोना तो चलता ही रहता जिंदगी में किन्तु जीवन के मुकाम के लिए संघर्ष ही काम आया है...
वो बात जो जरूरी है