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Showing posts from June 14, 2025

unspoken struggle related thought

इस दुनिया में स्त्री होना ही त्रासदी है जहां शादी और बच्चे के अलावा उसके जीवन में कोई प्राथमिकता नहीं समझी जाती है।  शर्म के नाम पर मौन, अंधविश्वास के नाम पर श्रद्धा और सुरक्षा के नाम बंदिश उसे दी जाती है। एक महिला का आर्थिक, शारीरिक , मानसिक रूप से मजबूत होना इसलिए भी जरूरी है ताकि उसे उसकी सीमा न बताई जाए।   सुंदरता के तराजू में उसे तौला, रूप के जाल में उसे इतना अंधा कर दिया कि खुद को देह बनाने के चलते इंसान होना भूल ही गयी।