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Showing posts from July 19, 2021

जीवन की सम्भावना को खोजना ही जीवन है कहता नाटक 'नदी प्यासी थी'

  नदी प्यासी थी (नाटक) : धर्मवीर भारती 'नदी प्यासी थी' नाटक धर्म वीर भारती का अंधा युग  के बाद प्रमुख नाटक में आता  है  ∣जिसमें पृष्ठ भूमि 1949 की बरसात की है ∣  इस नाटक में पात्र राजेश  शर्मा, शंकर दत्त, डॉ.कृष्णस्वरूप  कक्कड़  , शीला शंकर की पत्नी और पद्मा शीला की छोटी बहन होती है ∣ राजेश जो की एक लेखक होता हैं, उसके जीवन को मुख्य केन्द्र में रखकर धर्म वीर भारती ने इस नाटक को गढ़ा है ∣  जिसमें राजेश अपने जीवन से बहुत निराश हो गया होता है ∣ और जिस कारण वो अपने जीवन की लीला को समाप्त कर लेना चाहता है किन्तु वो उसका साहस नहीं जुटा पाता और इसी  बीच में अपने मित्र शंकर के घर जाता है∣  जहाँ उसकी मुलाकात शंकर की साली पद्मा से होती है जिसकी शादी डाॅ.  कृष्णस्वरूप कक्कड़ से होने वाली होती है ∣ किन्तु जब राजेश आ जाता है ∣ तब पद्मा उनके ज्ञान पर इतना मोहित ह़ो जाती है ∣ कि वो राजेश से विवाह करने की ठान लेती है ∣ और  डाॅ. कृष्णस्वरूप से विवाह न करने फैसला लेती है ∣ किन्तु राजेश नाटक के अंतिम चरण में पद्मा क़ो इस चीज से अवगत कर...