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Showing posts from May 10, 2020

जीवन को देखने का अलग नजरिया देता है सेवासदन**

सुमन एक स्वाबलम्बी  स्त्री है जो हमेशा जीवन को स्वतंत्र रूप से जीना चाहती है लेकिन वैसा जी नहीं पाती. उसका पति गजाधर  उसके चरित्र पर शक करता है और एक दिन उसे आधी रात को घर से निकाल देता है  तब वो साधनहीन स्त्री एक वैश्या का काम करने को मजबूर हो जाती  है और सुमन कुछ समय में " सुमन बाई " बन जाती है. लेकिन  समय   के साथ सुमन को ये जीवन  खराब सा लगने लगता है तब कुछ लोग ज़ो विधवा आश्रम चलाते हैं व़ो सुमन को उस आश्रम में आने को कहते हैं जिसके लिए वो राजी हो जाती है  और वो  आश्रम  चली जाती है वही दूसरी ओर सुमन की छोटी बहन  शान्ता जिसकी  शादी सदन से इसलिए टूट जाती है  क्योंकि उसकी बहन एक वैश्या   है. समय बीतने के साथ सुमन अपनी बहन शान्ता का उसी लड़के के साथ विवाह करवाती है जिसे कभी सुमन भी प्रेम करती थी लेकिन अब वो शान्ता का पति है जिसे ने  शान्ता से इसलिए संबंध तोड़े क्यों कि उसकी बहन एक वैश्या है . समय बीतने के साथ सुमन  शान्ता और सदन  का विवाह हिन्दू धर्म अनु...

माँ

क्यों नहीं  हम तेरे जैसे माँ तू चाहे कितनी भी नाराज हो लेकिन हमेशा सब का ध्यान रखती हो  पहले खाना हमको और फिर बाद में  तुम खाती हो  आज भी इसलिए  जब  भी चोट लगे  तो सबसे पहले तुम ही याद आती हो कितना भी बन जाएं  कामयाब हम लेकिन तेरे सामने सब चीजे छोटी ही लगती है माँ   तेरे आगे जीवन कि हर खुशी फीकी सी लगती है खुद की भी खुशियाँ मिल जाए  हमें  तुम बस यही दुआ करती  हो   आज भी  जब  चोट लगे हमें   तो सबसे पहले तुम ही याद  आती हो.