हमारी जरूरत पूरी करने में उनके न जाने कितने जूते घिस जाते, मम्मी तो अपना दुख जताती रोकर पर पापा अपने आसूं है छुपाते , तुम्हारी सादगी देख हम अपनी आंखों में सदा जीवन में ऊंच विचार के सपने है पाते कई तरह की परेशानी से जुझ रहे होते तुम किन्तु फिर भी घर में खुशी का माहौल हो सजाते, घर में सब की फरमाइशें एक बार कहने पर ही पूरी हो जाती, पर अपनी जरूरत तो जैसे आप भूल ही जाते, काश ये बच्चे माता पिता के संघर्ष को समझ पाते, आज जब दुखी होते हम किसी हार से तब पापा ही हमें हौसला न जाने कितना दे जाते..
वो बात जो जरूरी है