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Showing posts from March 18, 2021

कपड़े बनाम चरित्र

कपड़े और चरित्र का रिश्ता ऐसा बुन दिया गया है कि अगर किसी ने थोड़े ज्यादा  कपड़े पहने है तो उसे बहन जी और थोड़े कम पहने है तो उसे चरित्रहीन की दृष्टि से देखा जाता है जिसमें बुरी सोच होती है और आरोप कपड़ों की लम्बाई पर लगा दिया जाता है   क्या कपड़े व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करते हैं इस विषय पर चर्चा करते हुए मुझे स्वामी विवेकानंद का संस्मरण  याद आ गया जब वो शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन के लिए भाषण देने जाते हैं तो एक व्यक्ति उनके कपड़े पर कहता है कि अपने ये कैसे वस्त्र धारण किए हैं इस पर वो कहते हैं आपकी संस्कृति का निर्माण आपके दर्जी करते हैं जबकि  हमारी संस्कृति का निर्माण हमारा चरित्र करता है   आज हम सब भले ही इस बात पर ज्यादा ध्यान नही दे किन्तु ये बात हमेशा हमें देखने को मिलती है जब किसी कालेज में किसी कार्यक्रम में लड़के भले भी कुछ भी कपड़े पहने किन्तु लड़कियों के लिए सलीके के कपड़े पहने का आदेश दे दिया जाता है बिना उसकी मर्जी भले ही हमारे संविधान ने हमें अनुच्छेद 21 के अनुसार सम्मान पूर्वक जीने की स्वतंत्रता दी हो   इसके विपरीत विदेश में denim jeans...

खुल के जीने का

खुल के जीने का तरीका तुम सीखाते हैं, खुद से निकल जीते चल, जिंदगी एक सफर ये सुहाना, जैसे गीत हमें जीवन को खुलकर जीने का तरीका सीखाते हैं और बताते हैं कि जिंदगी में जो है आज  है इसलिए हमे अब को लेकर जीना चाहिए जो काम जिस समय के लिए बना है उसे उसी समय पूरा करने का लक्ष्य रखना चाहिए और जब अपनी व्यस्तम भरी जिंदगी से दो पल जिंदगी जीने के लिए निकले तो उसे ऐसे जीए कि अब वो आखिर क्योंकि गया वक्त कभी वापसी नहीं आता यहीं हमारे जीवन की सच्चाई जिसमें क ई बार हम उसके हाथ की कठपुतली बनकर रह जाते इसलिए जब जिंदगी तुम्हें जिंदगी जीने का वक्त दे तो उसमें जीओ.