Skip to main content

Posts

Showing posts from April 14, 2020

संवाद कहती कविता

मुनिया सो  जा भूखे पेट कल तो कोई देने वाला होगा,  माँ वो देख चांद किस तरह हम पर हंसता  हो गा क्या वो भी हमारे लिए भूखा होगा?  अरे नहीं मुनिया वो तो चन्द्रमा है वो क्यों भूखा होगा. माँ आसमान हम पर क्यों बरसता क्या वो भी भूखा होगा?  अरे नहीं मुनिया वो आसमान  है वो क्यों भूखा होगा. माँ देख नदी हमें  चिढ़ाती है क्या  वह भी भूखी होगी?  अरे नहीं मूनिया वो  तो नदियों की रानी  है वो क्यों भूखी होगी. माँ हम  तो इंसान है फिर क्यों  हम सब    भूखे हैं वो जो अमीर है उनकी झोली                             आज  पैसे से भरी है हर गरीब की झोली आज पैसे के  बिन  सूनी है. "हम नहीं बेटा ये पूरी दुनिया के लिए आज एक भंयकर सा तूफान है" "माँ मैं तो नहीं मानती ऐसी दुनिया को  जहाँ खाली पेट और मुंह में राम...

डॉ भीमराव अंबेडकर

आज भी डॉ.भीमराव अम्बेडकर जी के हमारे जीवन में बहुत मायने रखते हैं जिन्हें "संविधान का निर्माता " कहा जाता है   आज उन की जन्म तिथि है जो भारत के पहली कैबिनेट के पहले विधि मंत्री थे. भीमराव के जीवन में कष्ट कम नहीं थे लेकिन उन्हें सदैव खुद को बेहतर बनने के लिए प्रयास किया उनके जीवन में उन्होंने बहुत से कष्ट झेले लेकिन इसके बाबजूद अम्बेडकर ने खुद को कभी कम नहीं आंका अपनी क्षमता पर विश्वास किया जिस कारण उन्हें आज भी लोग भूले नहीं है     अम्बेडकर पर वो कहावत बिल्कुल सूट करती है" गूदड़ी का लाल" जिसका अर्थ गरीब के घर में गुणवान की उत्पत्ति होना है लेकिन उनके योगदान को भूल नहीं जा सकता इतना कष्ट झेलने के बाबजूद वो खुद के साथ इस देश का कल्याण कर गये. "आज समकालीन समय में हम भारतीयों को अपने संविधान के महत्व को समझना चाहिए जिसमें नागरिकों को अनुच्छेद 14 समता का अधिकार, अनुच्छेद 19 स्वतंत्रता का अधिकार, अनुच्छेद 23 शोषण के विरुद्ध अधिकार, अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, अनुच्छेद 29 संस्कृति और शिक्षा का अधिकार, अनुच्छेद 32 संवैधान...