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Showing posts from September 2, 2021

धूल

  अक्सर जिस घर में नहीं होते  है लोग  वहाँ लग जाती है धूल ,  जैसे अस्तित्व ही नहीं अब वहाँ लोगों का घर के बंद कमरे को देखकर ही मालूम चल जाता है  ∣ कि इसका निवासी छोड़ गया इसे अब नहीं है कोई रखवाला इस आशियाने    का  ∣ कहने की बातें होती है कि जिससे ज्यादा लगाव हो उसे भूलाया नहीं जाता ,अक्सर  इतनी जल्दी लोग भूल जाते हैं किसी चीज को जैसे  अपना कभी था ही नहीं वो ∣ जिस तरह एक   आलीशान घर में रहने के बावजूद उसकी खिड़कियों में जाले और घर के गेटों पर धूल जम जाती है ∣ ध्यान नहीं देने पर वैसे ही जिंदगी का संस्मरण धूल की गिरफ्ता में हो जाया  करता है, नजर अंदाज करने पर ∣ धूल और जाले अक्सर बता जाते हैं, किसी घर की हालात को कि कितना ध्यान दिया जाता है उस घर में ∣  भले वो बड़ा  हो या छोटा बनता वो जब ही वो   घर -घर है ∣ जहाँ उसे कोई अपने प्रेम से सीचता   द्वारपाल बनकर  उस घर के आंगन लगे फूलों को जिसकी खूबसूरती बयां कर जाती किसी घर के सुख चैन को  ∣ जिंदगी में अक्सर हम इतने आगे निकल जाते हैं ∣ कि कहने...