तब बोलना जरूरी हो जाता है जब किसी निर्दोष को मार दिया जाता हैं जब इंसानियत को कलंकित किया जाता है तब चुप नहीं रहा जाता है जहां बेगुनाह लोगों को यू ही मार दिया जाता है जो न इधर के न उधर के वो सिर्फ बच्चे होते हैं ∣ जो दुनिया को जाने बगैर ही इस दुनिया से अलविदा कर दिए जाते हैं। क्या हमने कभी जानने की कोशिश की कि युद्ध का साया पड़ने से बच्चों के मन पर उसका क्या असर होता है जो इस दुनिया में अभी आएं ही थे उन्हें क्यों यू ही मार दिया जाता है जो दुनिया को जानें बगैर इस दुनिया को छोड़ जाते हैं ∣ तब सवाल करना जरूरी हो जाता है कि क्या आज इंसानियत सच में खत्म हो चुकी है ∣
वो बात जो जरूरी है