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Showing posts from November 2, 2023

आज के समय के मुक्तानंदजी

बचपन में हिन्दी की एक कहानी पढ़ी थी जिसका शीर्षक ही ' मुक्तानंदजी ' जी था।  जिसमें एक ऐसे पात्र के बारे में बताया गया था जो कोई भी मुक्त की चीज लेने से पीछे नहीं हटते है।  फिर भी चाहे उसके चलते उन्हें कितनी भी परेशानी का सामना न करना पड़े।  आज के समय में इंसान भी कुछ इसी किस्म का हो गया है जो ये जानते हुए कि आज का जमाना किसी को एक पैसा भी मुफ्त का देने का नहीं है तब भी वो उसे लेता जाता है। ये जानते हुए की इसकी कीमत उसे किसी न किसी रूप में चुकानी होगी।