सिनेमा किसी समाज का दर्पण होता है जो समाज की अच्छाई -बुराई पर कटाक्ष करता है। जो न सिर्फ समाज के लोगों का मनोरंजन करता है बल्कि उनको शिक्षित करने का भी काम करता है। जब हम ' द गाइड ' मूवी को देखते है तो पाते है कि राजू (देवानंद) जब जेल से बाहर निकलता है। तब उसे समझ नहीं आता है कि वो कहां जाएं? जहां उसका एक मन उसे अपनी मां और प्रेमिका रोजी (वहीदा रहमान) के पास चलने को कहता है। वहीं दूसरा मन उसको बदनामी भरे संसार में जाने से रोकता है। ऐसे में राजू जीवन के भोग विलास से दूर किस तरह से जीवन के सत्य की खोज करता है ये देखना बड़ा ही दिलचस्प होता है ∣ जहां राजू अपने अतीत को भूला एक अजनबी गांव में निकल पड़ता है। वहां गांव के लोग राजू की बातों को सुन उसे 'ज्ञानी' समझने लगते है। एक दिन जब वो गांव के लोगों को अपनी मां की कहानी सुनाता है ∣ जैसे वो आगे चलकर सत्य में बदल जाती है ∣ मानों की उसे आने वाली विपत्ति का आभास हो गया था। उस गांव में भयानक अकाल पड़ जाता है।लोग दाने -दाने के मोहताज हो जाते है। इस बीच वो एक दूसरे के...
वो बात जो जरूरी है