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Showing posts from September 30, 2020

विचार करने की जरूरत है

  आज हम किस दुनिया में जी रहे हैं जहाँ एक तरफ हम विजुअल दुनिया में कदम रख रहे हैं हम आनलाईन ज्यादा और आफलाईन कम रह रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर हमारे दिमाग की सोचने की क्षमता भी धीरे धीरे कम सी होती जा रही है आज हम किसी भी चीज़ को अपने फोन में देख सकते हैं फिर भी हम खुश नहीं है. हजारों ऐसी चीज हमारे फोन में मौजूद है फिर भी आज हम खुद को अधूरा सा समझ रहे हैं हर चीज के उत्तर की तलाश के बावजूद हम खुद को खो चुके हैं. आज हमें मौजूदा समय में ये सोचना चाहिए कि ज्यादा फोन के उपयोग से कही हम तनाव पूर्ण जिंदगी तो नहीं जी रहे हैं.

ना रखती

 ये कैसा समाज हमने रच है डाला जहाँ बेटी को कोई नहीं पूछने वाला बेटे की चाह में कितनी बेटी क़ो पैदा कर  उसका गला है घोट डाला,  जहाँ माँ माँ न रह गयी  जहाँ पिता पिता न रह गया,  समाज से बेटी है पूछती  क्या बिगाड़ा उसने किसी का  जहाँ आज कोई नही उसका पूछने वाला,  जहाँ सड़क हर दिन किसी लड़की की इज्जत  आबरू गिरते देखती ,  हर बार किसी निर्भया के साथ  ऐसी दरंगी होती रहती,  जहाँ गर्भ में बेटी माँ से है बोलती माँ अच्छा होता कि तु मुझे गर्भ में ही मार देती ये दुनिया नहीं बेटियों की,  जहाँ बेटों की चाहत में बेटी  जन्म के बाद  किसी कचरे के डिब्बे में फेंकी होती,  या किसी की वासना का शिकार होकर वो अपने आप को खोती,  कभी हर बात पर हंसने वाली बेटी आज अपने बेटी होने पर रोती,  क्या मिलेगा उसे इंसाफ कभी ये पूछा रहीं एक बेटी अपनी माँ से होती?  माँ क्या बोले इस पर उसे जिसने हमेशा उसे गलत के लिए आवाज उठाना तो सिखाया,  किन्तु कभी तेरा साथ अगर गलत हो तो तु आवाज उठना ये तो माँ  ने कभी बोला ही नहीं,...