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Showing posts from August 2, 2020

आज क्यों भूल रहे हैं तुझे

संस्कृत  जो  समस्त भारतीय भाषाओं की मांं   है   हमारे पुराने ग्रन्थ, साहित्य  और  कलाओं का ज्ञान  भी इसी  भाषा में उपलब्ध है. संस्कृत   व्याकरण प्रधान भाषा है  जिसे  देववाणी भी कहा जाता है जिस कारण  अनेक देवी देवताओं की वंदना भी संस्कृत भाषा में ही की गई है . संस्कृत शब्द मुख्य रूप से 'सम्' उपसर्ग  तथा कृ धातु एवं क्त्  प्रत्यय  से मिलकर बना है  संस्कृत शब्द का शाब्दिक  अर्थ ' संस्कार की हुई ' जिसका  अर्थ उसके संशोधन  से है   इसे वेद भाषा और 'आदि भाषा' के नाम से   जाना जाता है. आपको बता दे कि इसके जनक स्वयं  पाणिनी  है इनके द्वारा लिखे गए ' अष्टाध्यायी ' नामक संस्कृत ज्ञान  है जिसमें  अनेकों सिध्दांत और सूत्र है जिसे 'संस्कृत व्याकरण' का नाम दिया गया है संस्कृत भाषा  जो   कम शब्दों में  भी बहुत कुछ कह देती  है  जैसे 'विद्या  विनयम् ददाति विद्यया पात्रता याति'. जिसका हिन्दी अर्थ विद्या हमें विनय द...

थोड़े बदलाव की जरूरत है

आज जहाँ आधे से ज्यादा लोगों की नौकरी खतरे में, आधे ज्यादा को नौकरी से निकाला जा चुका है तब हम सब युवा के सामने एक ही प्रश्न खड़ा है कि हम कैसे अपने काम को करे. वैसे तो आज हर किसी सपना एक अच्छी नौकरी पाने का है लेकिन बहुत कम  ही लोग ऐसे है जो ये सोच रहे हैं कि वो अपना व्यापार स्वयं खोलेंगे और दूसरों को नौकरी देगें . आज हमारी शिक्षा का मतलब केवल डिग्री नही  है बल्कि इसका अर्थ हम जिस क्षेत्र में पढ़ाई कर रहे हैं उसमें हमारी निपुणता होना भी  है. वर्तमान समय में जब हर किसी के सामने रोजी रोटी का प्रश्न खड़ा हो गया है तो ऐसे में उसके सामने केवल एक ही विकल्प बचता है कि वो अपने काम में इतना काबिल और जुनूनी हो जिसे लोग उसे काम पर लेने के लिए खोजे .