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Showing posts from July 21, 2023

केवल वो मनुष्य ही नहीं समझी जाती है

  कभी दुर्गा, कभी काली  कभी लक्ष्मी बन जाती है ∣  पर अफ़सोस वो इंसान ही नहीं समझी जाती है ∣ उस समय मानवता सबसे ज्यादा शर्मसार होती है जब एक स्त्री की लज्जा  सेरआम लूट ली जाती है ∣ कभी धर्म के नाम पर कभी शत्रुता के नाम पर उसके ही अधिकारों की होली जला दी जाती है ∣ वो स्त्री जो सबको सम्भाले हुए  होती है उसे ही बीच मझधार में छोड़ दिया जाता है ∣